॥ ॐ श्री गणेशाय नमः ॥
श्री हनुमान बाहुक
॥ छप्पय ॥
सिंधु तरन, सिआ-सोच हरन, रबि-बालुक बरन।
भुवन-बिदित बल-धाम, राम-पद-पद्म-भ्रमर-मन॥
केहरि-किसोर, संकट-हरन, सब बिधि समरथ, सब-हितू।
तुलसीदास के बाहु-लौ सकल-कलेस-निवारन, बाहुक-हेतू॥१॥
उतपति, स्थिति, प्रलय-करन, रावन-कुंभकरन-हन।
राम-काज-हित-अवतार, मारुति मति-गति-अति-गहन॥
महाबीर, बिक्रम, बज्रंग, बल-सागर, करुना-निकेत।
बाहु-पीर हरो तुलसी की, सुमिरत अति आरत-हित-हेत॥२॥
कनक-भूधर-आकार, तेज-पुंज, अति-उदार।
अतुलित-बल-धामा, राम-दूत, अतुल-प्रताप॥
ज्ञान-गुनाकर, कपीस, संकट-मोचन, सुख-धाम।
तुलसी की बाहु-पीर हरो, सुमिरि पवनसुत राम-नाम॥३॥
काल-करल-कराल-मुख, ग्रसन-चतुर सब-लोक।
सो संकट-मोचन कपीस, सुमिरत हत सब-सोक॥
राम-दूत, करुना-भवन, जानकि-सोक-विनास।
बाहु-पीर तुलसी की हरो, जय जय जय सुख-रास॥४॥
॥ सवैया ॥
जै अति-बल, जै अति-बिचच्छन, जानकि-सोक-बिनासन।
जै लंक-बिधंसन, राम-कृपा-पात्र, सुभ-आसन॥
अंजनि-सुत, केसरी-नंदन, पवन-पुत्र बल-धाम।
तुलसी की बाहु-पीर हरो, जय जय जय श्री राम॥५॥
बज्र-सरीर, सुबीर, महाप्रभु, संकट-मोचन नाम।
तुमरे बल-पौरुष को कहिबो, अति अगम सकाम॥
कृपा करो, बाहु-पीर हरो, अरज सुनहु कपीस।
तुलसीदास की बाहु-व्यथा मेटहु, हे जगदीस॥६॥
जय हनुमान, ज्ञान-गुन-सागर, जय कपीस तिहुँ लोक।
राम-दूत अतुलित-बल-धामा, हरहु सकल मम सोक॥
बाहु-पीर-हर, संकट-मोचन, कृपा-सिंधु, महाराज।
तुलसी की बाहु-व्यथा हरो, सिद्ध करो सब काज॥७॥
॥ दोहा ॥
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रुप ।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥
श्री राम जय राम जय जय राम ॥ श्री हनुमान जी महाराज की जय ॥
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥
श्री राम जय राम जय जय राम ॥ श्री हनुमान जी महाराज की जय ॥

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